Kali Shanivara Vrat
February 26, 2026 Thursday
Shanivara Vrat of Goddess Kali
माँ काली, देवी आदिशक्ति का उग्र एवं भयङ्कर स्वरूप हैं। अधर्म, भय, शत्रु, तामसिक विकारों तथा नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट करने हेतु देवी काली की पूजा-अर्चना की जाती है। विभिन्न हिन्दु धर्म ग्रन्थों एवं तन्त्र शास्त्रों में माँ काली को शनि, राहु, केतु तथा अन्य ग्रहों की उग्र स्थितियों को शान्त करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। तन्त्र परम्परा में यह दिन काली साधना हेतु अति उत्तम माना जाता है।
शनिवार के दिन को तामसिक माना जाता है तथा यह दिन ग्रह-दोष निवारण हेतु उत्तम होता है। सामान्यतः नवग्रहों के आधार पर यह दिन शनिदेव द्वारा शासित होता है, किन्तु यह दिन माँ काली की आराधना के लिये भी विशेष फलदायी माना गया है। एक अन्य मतानुसार माँ काली का व्रत एवं पूजन मङ्गलवार को भी किया जाता है।
पूर्ण भक्तिभाव एवं श्रद्धा पूर्वक माँ काली शनिवार व्रत करने से शनि पीड़ा, राहु-केतु दोष, बाधा, भय तथा शत्रुता का नाश होता है। इस व्रत से साधक को अदम्य साहस, निर्भयता तथा आत्मबल की प्राप्ति होती है। माँ काली की कृपा से व्रती को आध्यात्मिक उन्नति, शत्रु-विजय, तान्त्रिक शक्तियों से रक्षा एवं मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
माँ काली शनिवार व्रत आहार विचार
शनिवार के व्रत में आहार अत्यन्त संयमित एवं सात्त्विक होना चाहिये। व्रत में अन्न, चावल, लहसुन-प्याज, मांस, मदिरा आदि का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है। अन्नाहारी व्रत करने वालों को अधिक तेल-मसालों से युक्त भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिये। व्रत में फल, दूध, कुट्टू, समा, साबूदाना आदि का प्रयोग कर सकते हैं। कुछ तान्त्रिक परम्पराओं में काली साधना हेतु रात्रि उपवास अथवा निशा-जागरण का विधान भी होता है।
माँ काली शनिवार व्रत सङ्क्षिप्त विधि
माँ काली की पूजा शनिवार को प्रातः या रात्रि के प्रथम प्रहर में की जाती है। हालाँकि रात्रि पूजा विशेष प्रभावी मानी जाती है। पूजा की सरल विधि निम्न प्रकार है -
सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं काले वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त व्रत का सङ्कल्प ग्रहण करें - "मैं अपने समस्त रोगों, व्याधियों एवं कष्टों के निवारण हेतु 9 शनिवार तक श्रद्धापूर्वक माँ काली का व्रत करूँगा तथा व्रत के अङ्ग स्वरूप माँ काली का पूजन करूँगा।"
- सङ्कल्प ग्रहण करने के पश्चात् पूजा स्थल को स्वच्छ करें तथा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- तदुपरान्त एक लकड़ी के पाटे अथवा चौकी पर माँ काली की मूर्ति, चित्र अथवा श्री काली यन्त्र को स्थापित करें एवं माँ को लाल रंग की चुनरी उढ़ायें।
- माँ काली का ध्यान एवं आवाहन करते हुये गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि द्वारा देवी काली का पञ्चोपचार पूजन करें।
- माता को भस्म, काली हल्दी, काला वस्त्र, काले तिल, नींबू, गुड़, नारियल एवं नीले व काले पुष्प अर्पित करें।
- दीपक सरसों के तेल का होना चाहिये।
- माता के ॐ क्रीं कालिकायै नमः। मन्त्र का यथाशक्ति जाप करें।
- तदुपरान्त देवी काली चालीसा, काली सप्तशती के अंश विशेषतः दक्षिणा काली स्तोत्र का पाठ करें।
- ताम्बे के पात्र से काले तिल का तर्पण करें।
- अन्त में माँ काली शनिवार व्रत कथा का पाठ करें एवं आरती करके पूजन सम्पन्न करें।
इस प्रकार माँ काली शनिवार व्रत की सरल विधि सम्पूर्ण होती है।
माँ काली शनिवार व्रत उद्यापन
मान्यताओं के अनुसार माँ काली शनिवार व्रत 9 शनिवार तक किया जाता है। तदुपरान्त इस व्रत का उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन के दिन प्रातः स्नान आदि कर्मों से निवृत्त होकर काले वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त पूजन-स्थल को स्वच्छ कर चौक रचना करें।
एक लकड़ी की चौकी पर काला वस्त्र बिछाकर देवी काली की मूर्ति, चित्रपट अथवा यन्त्र स्थापित करें। विधि-विधान से माँ काली का षोडशोपचार पूजन करें। काली माता के मन्दिर में भोग अर्पण करें। उद्यापन के अवसर पर व्रती को रुद्राभिषेक अथवा काली पाठ अवश्य करना चाहिये। इसके अतिरिक्त किसी विद्वान आचार्य के मार्गदर्शन में माँ काली का हवन करना चाहिये।
11 या 21 कन्याओं को काले चने, गुड़, पूरी, हलवा आदि का भोजन करायें। ब्राह्मणों को वस्त्र, तिल, दक्षिणा आदि प्रदान करें। नींबू को काटकर उसमें तेल व बत्ती रखकर नींबू के दीपक से काली माँ की आरती करें। निर्विघ्न रूप से अपने सङ्कल्प की पूर्ति हेतु काली माँ के समक्ष कृतज्ञता व्यक्त करें। इस प्रकार माँ काली शनिवार व्रत की सरल उद्यापन विधि सम्पन्न होती है।