Murugana Mangalavara Vrat
February 26, 2026 Thursday
Murugana Mangalavara Vrat
भगवान मुरुगन, हिन्दु धर्म में पूजे जाने वाले सर्वाधिक प्रचलित देवताओं में से एक हैं। भगवान मुरुगन को मुरुगा, कार्तिकेय, स्कन्द, सुब्रह्मण्य, कुमारस्वामी आदि नामों से भी जाना जाता है। दक्षिण भारत में विशेष रूप से तमिल नाडु, केरल, कर्णाटक तथा आन्ध्र प्रदेश में भगवान मुरुगन अत्यधिक पूज्य माने जाते हैं तथा देवताओं के सेनापति के रूप में प्रतिष्ठित हैं। भगवान मुरुगन, भगवान शिव एवं माता पार्वती के पुत्र हैं।
दक्षिण भारत में मङ्गलवार का दिन मुरुगन स्वामी की उपासना के लिये अत्यन्त शुभ माना जाता है। नवग्रह मण्डल के आधार पर सप्तवारों में मङ्गलवार को मङ्गल देव शासित करते हैं तथा मङ्गल के अधिष्ठाता भगवान मुरुगन माने जाते हैं। साहस एवं निर्भयता की प्राप्ति तथा ऋण एवं रोगों से मुक्ति हेतु भक्तगण इस दिन एक दिवसीय व्रत का पालन करते हैं।
दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में मङ्गलवार व्रत को चेववई व्रतम् कहा जाता है। इस दिन श्रद्धा भाव से उपवास का पालन करते हुये श्रद्धालु भगवान मुरुगन की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। तमिल पञ्चाङ्ग के अनुसार थाई माह के मङ्गलवार को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत का प्रारम्भ एवं उद्यापन, दोनों के लिये थाई माह के मङ्गलवार को अत्यन्त शुभ और फलदायक माना जाता है।
मुरुगन मङ्गलवार व्रत आहार विचार
मुरुगन मङ्गलवार व्रत के दिन सात्त्विकता एवं संयम का विशेष महत्व होता है। इस दिन उपवास करने वाले भक्त प्रायः नारियल पानी, केला, सेब आदि केवल फलाहार का ही सेवन करते हैं। अन्नाहार से व्रत का पारण करने वाले लोग एक समय सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें पारम्परिक रूप से पंजीरी, पायसम तथा तेल रहित व्यञ्जन सम्मिलित होते हैं।
मुरुगन मङ्गलवार व्रत में प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, अधिक मसालेदार तथा तेल एवं घी युक्त भोजन का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।
मुरुगन मङ्गलवार व्रत सङ्क्षिप्त विधि
सर्वप्रथम प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात् 9 मङ्गलवार तक निरन्तर व्रत करने का सङ्कल्प ग्रहण करें - "मैं अपने समस्त कष्टों के निवारण, दीर्घायु तथा सभी मनोरथों की सिद्धि हेतु 9 मङ्गलवार व्रत एवं पूजन करूँगा तदुपरान्त उद्यापन करूँगा। मेरे इस व्रत से भगवान मुरुगन प्रसन्न होकर कृपा दृष्टि करें।"
- तदुपरान्त सम्भव हो तो पूजन स्थल को गोबर से लीपकर उस पर चौक पूरें एवं एक लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीला वस्त्र बिछायें।
- तत्पश्चात् चौकी पर भगवान मुरुगन की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें।
- प्रभु को पञ्चामृत आदि से स्नान कराने के पश्चात् केवड़ा, कुमकुम, चन्दन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से षोडशोपचार पूजन करें।
- विशेषतः कनेर, चम्पा, चमेली आदि के पुष्प तथा नारियल अवश्य अर्पित करें।
- व्रत की सम्पन्नता हेतु मुरुगन मङ्गलवार व्रत कथा का पाठ करें।
- भगवान मुरुगन के ॐ स्कन्दाय नमः। मन्त्र का यथाशक्ति जाप करें।
- पूजन के अन्त में भगवान से सन्तान सुख, विजय तथा रोग मुक्ति आदि कामनाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें।
इस प्रकार मुरुगन मङ्गलवार व्रत की सङ्क्षिप्त एवं सरल विधि सम्पन्न होती है।
मुरुगन मङ्गलवार व्रत उद्यापन
मुरुगन मङ्गलवार व्रत का पालन निरन्तर 9 मङ्गलवार तक किया जाता है। तदुपरान्त पूर्ण भक्तिभाव से व्रत का उद्यापन विधिपूर्वक किया जाता है।
उद्यापन के दिन सर्वप्रथम प्रातः किसी पवित्र नदी अथवा जलाशय में स्नान एवं तर्पण करें। यदि यह सम्भव न हो, तो गङ्गाजल मिश्रित जल से स्नान करें। तदनन्तर भगवान मुरुगन के मन्दिर में जाकर उनका अभिषेक करें अथवा पण्डित जी से करवायें। भगवान के ॐ शरवणभवाय नमः। मन्त्र से 108 आहुतियों सहित हवन करें। तदुपरान्त अन्नदान एवं भोज आदि का आयोजन करें। ब्राह्मणों, कन्याओं तथा साधुओं को भोजन करायें तथा वस्त्र एवं दक्षिणा प्रदान करें। भगवान मुरुगन को करुंगली वेल अर्थात् एक प्रकार का लकड़ी का भाला अर्पित करें।
जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान मुरुगन की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। मुरुगन व्रत सभी प्रकार के अज्ञात भय एवं सङ्क्रामक रोगों से रक्षा करता है तथा साहस एवं सामर्थ्य में वृद्धि करता है। इस व्रत को निष्ठापूर्वक करने से नकारात्मकता, कुदृष्टि तथा ग्रह दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है।