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Vaibhava Lakshmi Shukravara Vrat

February 26, 2026 Thursday

Shukravara Vrat of Goddess Vaibhava Lakshmi

शुक्रवार को किया जाने वाला माँ वैभव लक्ष्मी का व्रत मुख्य रूप से गृहिणियों, अविवाहित कन्याओं एवं दम्पतियों के मध्य एक अत्यन्त लोकप्रिय व्रत है। उत्तर भारत में वैभव लक्ष्मी व्रत अधिक प्रचलित है। वैभव लक्ष्मी व्रत गृहस्थ जीवन में सन्तुलन, सुख-समृद्धि तथा धन-सम्पदा की प्राप्ति हेतु किया जाता है। यह व्रत देवी लक्ष्मी के वैभवशाली स्वरूप को समर्पित है, जो जीवन में ऐश्वर्य, सुख-शान्ति, सौभाग्य तथा सौन्दर्य प्रदान करती हैं। मान्यताओं के अनुसार भक्तिपूर्वक वैभव लक्ष्मी व्रत करने से घर से दरिद्रता का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।

Goddess Vaibhava Lakshmi

हालाँकि नवग्रहों के आधार पर शुक्रवार, शुक्रदेव द्वारा सञ्चालित होता है। किन्तु धर्मग्रन्थों में शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को भी समर्पित माना गया है। देवी लक्ष्मी हिन्दु धर्म में पूजी जाने वाली प्रमुख देवियों में से एक हैं। आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी आदि देवी लक्ष्मी के आठ रूप हैं जिन्हें संयुक्त रूप से अष्ट लक्ष्मी के नाम से जाना जाता है। इन्हीं में से देवी धन लक्ष्मी को ही वैभव लक्ष्मी के नाम से भी पूजा जाता है। वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत का पालन श्रद्धा, भक्ति एवं नियम पूर्वक करने से पारिवारिक सुख, धन-वैभव तथा आध्यात्मिक सन्तोष की प्राप्ति होती है।

वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत आहार विचार

यदि समर्थ हैं तो पूर्ण उपवास का पालन करना चाहिये तथा सन्ध्याकाल में पूजन-कथा आदि सम्पन्न करने के उपरान्त माता को अर्पित कर खीर का प्रसाद ग्रहण करना चाहिये। यदि पूर्ण उपवास नहीं कर सकते तो फलाहार अर्थात् फल एवं फलों के रस से व्रत का पालन करें।

स्वास्थ्यवश उपवास कठिन हो रहा हो, तो एक समय अन्नाहार ग्रहण किया जा सकता है, परन्तु वह पूर्णतः सात्त्विक होना चाहिये। अन्यथा प्रयास करें कि व्रत में केवल फल, दूध, सूखे मेवे, साबूदाना, शकरकन्द, राजगिरा तथा सिंघाड़े आदि उपवास-योग्य पदार्थों का ही सेवन किया जाये।

वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत सङ्क्षिप्त विधि

मान्यताओं के अनुसार यह व्रत सदैव अपने घर पर ही करना चाहिये। यदि यात्रा अथवा प्रवास पर गये हों तो उस शुक्रवार का व्रत त्यागकर आगामी शुक्रवार का व्रत करना चाहिये। शुक्रवार के दिन स्त्रियों को रजस्वला अथवा सूतक आदि की स्थिति में व्रत नहीं करना चाहिये। ऐसी स्थिति होने पर आगामी शुक्रवार से व्रत करना चाहिये। व्रत के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ एवं शुद्ध वस्त्र धारण करें। तदुपरान्त श्रद्धानुसार स्वयं की एवं कुटुम्ब की कुशलता एवं समृद्धि की कामना से 11, 21 अथवा 51 शुक्रवार व्रत करने का सङ्कल्प ग्रहण करें - "मैं सुख-समृद्धि, शान्ति एवं सौभाग्य की प्राप्ति हेतु नियमित रूप से माता वैभव लक्ष्मी का व्रत शुक्रवार को करूँगा। व्रत के अङ्ग स्वरूप श्री वैभव लक्ष्मी का पूजन भी करूँगा।"

  • तत्पश्चात् सम्भव हो तो पूजन स्थल को गोबर से लीपें अन्यथा गङ्गाजल से स्थान को पवित्र कर चौक पूरें।
  • एक लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उसपर देवी लक्ष्मी की प्रतिमा, चित्र अथवा श्री यन्त्र विराजमान करें।
  • देवी लक्ष्मी के साथ ही स्वर्ण अथवा रजत के आभूषण पूजन में रखें। आभूषण आदि उपलब्ध न होने पर कुछ धन पूजन में रखें।
  • तदुपरान्त भक्ति भाव से गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत्, नैवेद्य तथा फल आदि से देवी वैभव लक्ष्मी का पूजन करें।
  • यथाशक्ति ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। मन्त्र का जाप करें तथा श्रीलक्ष्मी स्तोत्रम् का पाठ करें।
  • तदुपरान्त व्रत का सम्पूर्ण पुण्यफल प्राप्त करने हेतु वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ करें।
  • कथा सम्पन्न होने के उपरान्त लक्ष्मी माता की आरती करें एवं व्रत की सफलता हेतु प्रार्थना करें।
  • अन्ततः हलवा, खीर तथा फल आदि का प्रसाद वितरण करें।

इस प्रकार वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत की पूजन विधि सम्पन्न होती है।

वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत उद्यापन

सङ्कल्प लेते समय 11, 21, 51 आदि जितनी भी सङ्ख्या निर्धारित की गयी हो, उतने व्रत सम्पूर्ण होने पर उद्यापन करना चाहिये। उद्यापन का मुख्य उद्देश्य माँ लक्ष्मी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना एवं व्रत को विधिपूर्वक सम्पन्न करना है।

उद्यापन वाले दिन विशेष साज-सज्जा कर सुन्दर मण्डप में माँ लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। जिस प्रकार अन्य शुक्रवार को पूजन करते हैं उसी प्रकार पूजन करें। उद्यापन के दिन देवी माँ को विशेष रूप से खीर, 5 प्रकार के फल, 5 प्रकार के मिष्टान्न, पञ्चमेवा तथा लाल वस्त्र अर्पित करें। पूजन सम्पन्न होने पर एक नारियल फोड़ें।

तदुपरान्त सामर्थ्यानुसार 7, 11 अथवा 21 सुहागिन स्त्रियों या कन्याओं को भोजन करायें। भोजन में खीर अवश्य सम्मिलित करें। भोजनोपरान्त उन्हें श्रद्धापूर्वक सिन्दूर, चूड़ी, बिन्दी आदि सोलह शृङ्गार की सामग्री एवं दक्षिणा प्रदान करें। कुछ स्थानों पर वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक तथा लाल कपड़े में 11 अथवा 21 रुपये की दक्षिणा दी जाती है।

अन्त में देवी माँ के नाम का जयघोष करते हुये अपने व्रत की पूर्णता हेतु माँ लक्ष्मी को धन्यवाद दें तथा सभी के लिये सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की कामना करें। इस प्रकार शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत का उद्यापन सम्पूर्ण होता है।